सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Contact us


Contact Us

If you have any query regrading Site, Advertisement and any other issue, please feel free to contact at anshitparmar595@gmail.com

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

(पंचतंत्र की कहानी)एकता का बल

एक समय की बात हैं कि कबूतरों का एक दल आसमान में भोजन की तलाश में उडता हुआ जा रहा था। गलती से वह दल भटककर ऐसे प्रदेश के ऊपर से गुजरा, जहां भयंकर अकाल पडा था। कबूतरों का सरदार चिंतित था। कबूतरों के शरीर की शक्ति समाप्त होती जा रही थी। शीघ्र ही कुछ दाना मिलना जरुरी था। दल का युवा कबूतर सबसे नीचे उड रहा था। भोजन नजर आने पर उसे ही बाकी दल को सुचित करना था। बहुत समय उडने के बाद कहीं वह सूखाग्रस्त क्षेत्र से बाहर आया। नीचे हरियाली नजर आने लगी तो भोजन मिलने की उम्मीद बनी। युवा कबूतर और नीचे उडान भरने लगा। तभी उसे नीचे खेत में बहुत सारा अन्न बिखरा नजर आया “चाचा, नीचे एक खेत में बहुत सारा दाना बिखरा पडा हैं। हम सबका पेट भर जाएगा।’ सरदार ने सूचना पाते ही कबूतरों को नीचे उतरकर खेत में बिखरा दाना चुनने का आदेश दिया। सारा दल नीचे उतरा और दाना चुनने लगा। वास्तव में वह दाना पक्षी पकडने वाले एक बहलिए ने बिखेर रखा था। ऊपर पेड पर तना था उसका जाल। जैसे ही कबूतर दल दाना चुगने लगा, जाल उन पर आ गिरा। सारे कबूतर फंस गए। कबूतरों के सरदार ने माथा पीटा “ओह! यह तो हमें फंसाने के लिए फैलाया गया जाल था। भूख...

चोर चोरी से जाए हेरा फेरी से न जाये

एक जंगल की राह से एक जौहरी गुजर रहा था। देखा उसने राह में। एक कुम्हार अपने गधे के गले में एक बड़ा हीरा बांधकर चला आ रहा है। चकित हुआ। ये देखकर कि ये कितना मूर्ख है। क्या इसे पता नहीं है कि ये लाखों का हीरा है। और गधे के गले में सजाने के लिए बाँध रखा है। पूछा उसने कुम्हार से। सुनो ये पत्थर जो तुम गधे के गले में बांधे हो। इसके कितने पैसे लोगे ? कुम्हार ने कहा - महाराज ! इसके क्या दाम। पर चलो। आप इसके आठ आने दे दो। हमनें तो ऐसे ही बाँध दिया था कि गधे का गला सूना न लगे। बच्चों के लिए आठ आने की मिठाई गधे की ओर से ल जाएँगे। बच्चे भी खुश हो जायेंगे। और शायद गधा भी कि उसके गले का बोझ कम हो गया है।पर जौहरी तो जौहरी ही था। पक्का बनिया। उसे लोभ पकड़ गया। उसने कहा आठ आने तो थोड़े ज्यादा है। तू इसके चार आने ले ले। कुम्हार भी थोड़ा झक्की था। वह ज़िद पकड़ गया कि नहीं देने हो तो आठ आने दो। नहीं देने है। तो कम से कम छह आने तो दे ही दो। नहीं तो हम नहीं बेचेंगे। जौहरी ने कहा - पत्थर ही तो है।चार आने कोई कम तो नहीं। उसने सोचा थोड़ी दूर चलने पर आवाज दे देगा। आगे चला गया। लेकिन आधा फरलांग चलने के बाद भी...

ऐसे हुई शिव की 51 शक्तिपीठों की स्थापना

ब्रह्मा के पुत्र प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ। कुछ समय बाद दक्ष को पूरे ब्रह्माण्ड का अधिपति बना दिया गया। इससे दक्ष में अभिमान आ गया। वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगा। एक यज्ञ में भगवान शिव द्वारा खुद को प्रणाम न करने पर दक्ष ने उन्हें अनेक अपशब्द कहे। दक्ष ने शिव को शाप दिया कि उन्हें देव यज्ञ में उनका हिस्सा नहीं मिलेगा। यह सुनकर नंदी ने भी दक्ष को शाप दिया कि जिस मुंह से वह शिव निंदा कर रहा है वह बकरे का हो जाएगा। कुछ समय बाद दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया। उसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया पर अभिमानी दक्ष ने शिव को उस यज्ञ से बहिष्कृत कर दिया। किसी तरह सती को यह पता चला तो उन्होंने शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। पहले तो शिव ने उन्हें समझाया पर जब वे नहीं मानीं तो उन्होंने सती को वहां जाने की अनुमति दे दी। सती अपने पिता के घर पहुंची तो दक्ष ने उनसे आंखें फेर लीं। सती यज्ञ में शिव का भाग न देखकर रूष्ट हो गईं और सभी को बुरा-भला कहने लगीं। यह सुनकर दक्ष ने भी शिव निंदा प्रारम्भ कर दी।यह सुनकर सती को बड़ा दुख हुआ और उन्होंने योगाग्रि...